Ranchi
बहुप्रतीक्षित नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ का रांची के सुजाता सिनेमा हॉल में भव्य प्रीमियर
झारखंड में लंबे अरसे के बाद बड़े बजट की नागपुरी फिल्म सेरेंग रिलीज होने जा रही है, झारखंड की ज्वलंत मुुद्दे पर अधारित यह फिल्म में राज्य के लिए नासूर बन चुकी संस्याओं में से एक नक्सलीयों का खुला तांडव,ने न जाने अब तक हजारों मांग की सिंदूर उजाड़ चुकी है, और कई बच्चों के सिर से माता पिता का साया छिन चुका है ऐसा एक दो मामला नहीं अनगिनत मामला अब तक प्रकाश में आ चुका है।
इसी के इर्द गिर्द इस फिल्म को पिरोया गया है

ज्वलंत मुद्दा पर आधारित यह फिल्म लोगों के आँखों में आंसू भर देती है, इस फिल्म में नागपुरी सिंगर के रूप में स्थापित हो चुके नितेश कच्छप ने साबित कर दिया की वे न सिर्फ स्टेज प्रोग्राम में लोगों को झूमा सकते हैं बल्कि सशक्त रूप अभिनय करके भी लोगों के बीच अपना अमिट छाप छोड़ सकते हैं, नागपुरी फिल्मी दुनिया के जाने माने कलाकारों में से एक विवेक नायक भी सेराज अंसारी के रोल में नजर आ रहे हैं इस फिल्म अपनी प्रेमिका से दिल तो लगा लेते हैं लेकिन शादी अपनी भाभी से पारिवारिक मजबूरी में निकाह कर लेते हैं। एक बेबस लड़की जो लोकल नेताओं के जुल्म से अपने माता पिता की ह्त्या से खौफ में घर छोड़कर शहर आती है अंजान शहर में कोई भी अपना नही रहत है ददर दर जाकर नौकरी ढूंढती है लेकिन कहीँ जॉब नहीं मिलता इसी बीच एक चाय दुकान में सेराज अंसारी की नजर बेबस माघी पर पड़ता है जो नौकरी की तलाश मे भटक रही है उसे सिराज बैंड बाजा के शादी पार्टी में लाइट सिर में ढोने का काम करती है और धीरे धीरे एक दिन खुद का बैंड बाजा का टीम चलाती है
फिल्म में कई मोड़ है जहाँ लोगों को इमोशनल भी कर देता है
फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है
सिंगर नितेश कच्छप यानी संदीप गांव का सीधा साधा लड़का अपने गांव की बदहाली कोदूर करने के लिए लोकल नेता जयमंगल बडाइक् को चुनाव जितान के लिए एड़ी चोटी लगा देता लेकिन एक घटना ने उस नक्सलियों के संगठन में शामिल होने और कुख्यात एरिया कमांडर बनने पर मजबूर कर देता है
झारखंड की राजनीतिक उथल पुथल नक्सली के नाम पर आम जनता के उपर पुलिसिया जुल्म , जल जंगल जमीन का खुल्लेआम दोहन और शोषण को जीवंत करती यह नागपुरी फिल्म सेरेंग।

नक्सली और सिस्टम की खेल ने लोगों को पलायन करने पर किया मजबूर
जब राज्य में नक्सलियों का बंदूक की नोक पर खुल्लेआम तांडव मचाना शुरु हुई तो हजारों ग्रामीणों को गांव छोड़कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया है
सच्ची घटना पर आधारित यह फिल्म लोगों को न सिर्फ मनोरंजन करायगी बल्कि अपनी मिट्टी से भी जोड़ कर रखेगी। झारखंड का शायद ही जिला हो जो नक्सलियों के आतंक से झुलसा न हो। लोगों को बेघर होने पर मजबूर कर दिया। इस फिल्म ने एक बार फिर यादों को ताजा कर दिया है। आज भी कई परिवार कभी कभार ही अपना घर लौटते हैं। नक्सलियों के दमन के दौर में लोगों को दोहरी मार भी झेलना पड़ा, दिन में अगर पुलिस गांव आती तो ग्रामीणों को नक्सलियों का मुखबिर के आरोप में बेकसूरों पर पुलिसिया जुल्म ढाती तो वहीं शाम ढलते ही नक्सलियों के द्वारा उन्ही ग्रामीणों से खाना बनवाना और पुलिस के मुखबिर के आरोप में जन अदालत लगाकर सरेआम सजा देना। कई लोगों की जान भी चली गई। 
आज स्पेशल स्क्रीनिंग में पहुंचे दर्शक और नागपुरी फिल्मी दुनिया के कलाकारों ने कहा यह फिल्म उन्हे बेहद पसंद आया, दर्शकों से भी सिनेमा हॉल आकर फिल्म देखने की अपील की।
चार भाषाओं में एक साथ होगी रिलीज
यह फिल्म झारखंड की पहली ऐसी फिल्म है जो नागपुरी, खोरठा, संथाली और हिंदी चार भाषाओं में रिलीज होगी।
निदेशक पुरोस्तम NPK की फिल्मी दुनिया की राह बेहद संघर्ष पूर्ण रहा है जलड़ेगा से निकल कर अब लंदन मे फेलोसिप लेकर पढाई करने जाने वाले है।
झारखंड के छोटे से जिला सिमडेगा से निकल कर अब सिल्वर स्क्रीन पर अपना निर्देशन का जौहर दिखा रहे हैं।
रफ्तार मीडिया से बातचीत में कहा झारखंड की खूबसूरत वादियों के साथ साथ कला संस्कृति को विश्व पटल पर दिखाने की कोशीश हमारी पूरी ने किया है।
वहीं फिल्म के मुख्य कलाकर विवेक नायक और नक्सली एरिया कमांडर का किरदार निभा रहे नितेश कच्छप ने कहा झारखंड की जमीन से जुड़ी मुद्दा पर यह फिल्म लोगों को एक अलग अनुभव देगा।













