रांची | सिटी रिपोर्टर
नामकुम थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर रिंगरोड स्थित अरविंद टेक्सटाइल लिमिटेड में कार्यरत युवतियों को बैंगलोर भेजने एवं नहीं जानें पर जबरजस्ती रिजाइन देने का सनसनी खेज मामला प्रकाश में आया है नौकरी से हटाए जाने से महिला कर्मचारी भविष्य लेकर चिंतित है,जॉब से निकाली गई युवतियों ने सूबे के CM हेमंत सोरेन,उद्योग मंत्री,श्रम मंत्री, रांची सांसद, विधायक, रांची डीसी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है, युवतियों ने बताया कि अधिकतर युवतियां रांची व आसपास के जिलों की रहने वाली है. पिछले पांच -छह सालों से अरविंद टेक्सटाइल मिल में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं.तमाम युवती या महिला अपना और अपने परिवार को आर्थिक सहयोग करती है।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षा निर्णय को ठेंगा दिखा रहे हैं कंपनी
हेमंत सोरेन ने साल 2021 में के सदन विधानसभा में कहा था राज्य के मूलनिवासी युवाओं को निजी कम्पनी में नियुक्ति करना अनिवार्य है,सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, हरियाणा की तर्ज पर झारखंड में भी 75 फीसदी नौकरियां राज्य के युवाओं के लिए आरक्षित, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी अधिकारियों को इस सम्बंध में निर्देश देते हुए कहा है कि, वो इस नयी पॉलिसी को लागू करते हुए ये भी सुनिश्चित करें कि, निजी क्षेत्र की कंपनियां पालन कर रही या नहीं, लेकिन सूबे में सैकड़ो कम्पनी इस नियम कानून का खुल्लेआम उलंघन करते नजर आ रहे हैं .

जॉब ही एक मात्र सहारा, वो भी जाने का भय
कई ऐसी भी महिला अरविन्द टेक्सटाइल में कार्यरत हैं जिनका घर परिवार और बच्चे भी इनके नौकरी पर आश्रित हैं
किसी का पति छोड़ दिया है या किसी कर्मचारी के पति का निधन हो चूका है, जॉब करके अपने परिवार का बमुश्किल से भरण पोषण कर पा रही है,ऐसी विकट परिस्थिति में छोटे बच्चों और परिवार को अकेले छोड़कर जाने में असमर्थ हैं लेकिन कम्पनी के सीनियर बैंगलोर जाकर ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल नहीं होने से अपने यहाँ कार्यरत महिलाओं को बस इस शर्त को न पूरी करने पर नौकरी से बैगैर सहमति के निकालने से भयभीत हैं अब उन्हें अपना आगे का जीवन इस मुश्किल समय में अंधकार मय नजर आ रही है।

गरीब असहाय युवतियों को बेसहारा कर दिया अरविन्द टेक्सटाइल लिमिटेड
यहां काम कम होने एवं दो महीने के प्रशिक्षण के लिए बैंगलोर जाने के लिए दबाव लगातार दिया जा रहा है. युवतियों के द्वारा जानें से मना करने पर सभी महिला कर्मचारी को जबरदस्ती रिजाइन दिलाया जा रहा है. कम्पनी में कार्यरत सुनिता कुमारी ने बताया कि कंपनी के द्वारा स्थानीय आदिवासी और मूलवासी युवतियों का शोषण किया जा रहा है. उनकी इच्छा के विरुद्ध बैंगलोर भेजा जा रहा. मना करने पर हटा दिया गया. बुंडू निवासी ऑपरेटर दीपा कुमारी ने बताया कि परिवार से अनुमति नहीं मिलने पर रिजाइन दिला दिया गया. नाम न छापने की शर्त पर विधवा महिला ने बताया की पति की मृत्यु के बाद दो बच्चों का भरण-पोषण कर रहें हैं. बैंगलोर जाने से मना कर दिया तो अब हटा दिया गया. अब भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है।
कंपनी के अधिकारी पुरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं
इस पुरे मामले पर कम्पनी के अधिकारी पूरी तरह से खामोश हैं कम्पनी अपने नियम का हवाला दे रही है टेक्नीकल अपग्रेड करने के बहाने कई कर्मचारीयों की नौकरी दांव पर लगी हुई है, राज्य की सबसे बड़ी मिडिया हॉउस में से एक प्रभात खबर ने भी प्रमुखता से इस मामला को उठाया है। अब देखना बड़ा दिलचस्प होगा क्या कंपनी अपनी नियम में किसी प्रकार की सुधार करती है या नौकरी छीन कर ही दम लेगी। एक तरफ पूरी दुनिया में इजराइल ईरान युद्ध के कारण कई तरह की चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर हैं। वहीं अब जॉब जाने का भय सताने लगा है कई महिला कर्मचारियों की, फ़िलहाल रात की नींद उड़ी हुई है।














