रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में अपने राज्य में स्टार प्रचारक के रूप में सबसे लोकप्रिय हुई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने बुधवार को असम में विधानसभा चुनाव प्रचार की धुंआधार शुरुआत की. झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए उत्साहित करने वाली बात यह है कि असम में पार्टी की पहली चुनावी सभा सफल मानी जा रही है.
सीएम हेमंत सोरेन की लोकप्रियता में हुआ है इजाफा

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि हम पहले ही कह चुके हैं कि जब बीजेपी के इशारे पर ईडी ने हमारे नेता हेमंत सोरेन को गलत मामले में जेल भेजा था, तो विपत्ति के समय में हमें एसेट के रूप में कल्पना सोरेन मिलीं. सिर्फ झारखंड नहीं बल्कि पूरे देश में सीएम हेमंत सोरेन की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है और असम विधानसभा चुनाव में कल्पना सोरेन की पहली सभा में उमड़ी भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि हमारे नेता और पार्टी का जनाधार बढ़ा है.
चबुआ में झामुमो उम्मीदवार के लिए कल्पना सोरेन ने चुनावी सभा की

असम विधानसभा चुनाव में चबुआ विधानसभा से झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रत्याशी भूबेन मुरारी के पक्ष में गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने चुनावी सभा की. चबुआ विधानसभा से झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रत्याशी भूबेन मुरारी के पक्ष में मतदान की अपील करते हुए गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागान के मजदूरों की आवाज झामुमो बनेगा.
चाय बागान के मजदूरों से मिलीं कल्पना सोरेन
विधायक कल्पना सोरेन एवं सांसद जोबा माझी ने चबुआ विधानसभा स्थित चाय बागान में कार्यरत मजदूरों से बातचीत कर उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त की.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम में डेरा जमाये हुए है। विधानसभा चुनाव को लेकर वो जेएमएम समर्थित उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे है इसके साथ ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जीत की रणनीति बना रहे है। लेकिन वो अपनी रणनीति से कांग्रेस को चुनौती दे पाएंगे या कांग्रेस को नुकसान करेंगे। इसका अंदाजा लगाना, अभी मुश्किल है।
जेएमएम नेताओं के साथ बैठक की
उधर, असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने के उद्देश्य से सोमवार को डिब्रूगढ़ में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में असम के विभिन्न क्षेत्रों से आए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने चुनावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
जमीनी पकड़ मजबूत करने पर जोर

इस बैठक में असम के आदिवासी, शोषित और वंचित समाज बहुल क्षेत्रों में पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए क्षेत्रवार रणनीतिक योजना और जनसंपर्क कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की। सोरेन ने स्पष्ट किया कि झामुमो हमेशा से शोषित, वंचित और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा करने वाली पार्टी रही है और यही विचारधारा असम में भी पार्टी का आधार बनेगी।
असम चुनाव सामान्य से बढ़कर
हेमंत सोरेन ने जेएमएम नेताओं के साथ बातचीत के दौरान कहा कि असम का यह चुनाव सामान्य चुनाव से बढ़कर है। यह पहचान, आवास, जमीन एवं अन्य अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत है। जिस ढंग के घरों में रहने को मेरे आदिवासी भाई-बहन रहने को विवश वह अक्षम्य है, यहां की सरकारों द्वारा किया गया अपराध है।
अगर झारखंड 3 कमरे का आवास अपने गरीब लोगों को दे सकता है, 50 लाख महिलाओं को 2500 रु. प्रति महीना का सम्मान राशि दे सकता है तो असम में क्यों नहीं दिया जा सकता है? असम में अभी सरकारों ने बारी-बारी से असम के आदिवासियों को ठगने का काम किया है, उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखने का काम किया है। लेकिन अब और नहीं।

बैठक के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने आगामी चुनावों में पूरी प्रतिबद्धता, अनुशासन और एकजुटता के साथ मैदान में उतरने का सामूहिक संकल्प लिया। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने विचार साझा करते हुए जमीनी स्तर पर कार्य करने के लिए ‘रोडमैप’ प्रस्तुत किया। बैठक मंत्री चमरा लिंडा समेत झामुमो के कार्यकर्ता उपस्थित थे।













