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भारत की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NavIC (Navigation with Indian Constellation) को लेकर नई चिंता सामने आई है। हाल ही में एक प्रमुख सैटेलाइट के तकनीकी खराब होने के बाद इस प्रणाली के सक्रिय सैटेलाइट की संख्या घटकर केवल तीन रह गई है, जो कि नेविगेशन सेवा के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या से कम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही नए सैटेलाइट लॉन्च नहीं किए गए तो इस प्रणाली की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
क्या है NavIC प्रणाली
NavIC भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने विकसित किया है। यह प्रणाली GPS की तरह काम करती है और भारत तथा आसपास के क्षेत्रों में सटीक लोकेशन और समय की जानकारी प्रदान करती है।
इस तकनीक का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:
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नेविगेशन और मैप सेवाएं
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समुद्री और हवाई परिवहन
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आपदा प्रबंधन
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सैन्य और सुरक्षा कार्य
तकनीकी खराबी से घटे सक्रिय सैटेलाइट
हाल ही में NavIC नेटवर्क के एक सैटेलाइट की एटॉमिक क्लॉक में खराबी आने की खबर सामने आई। इसके कारण प्रणाली में सक्रिय सैटेलाइट की संख्या कम हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेविगेशन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए न्यूनतम सैटेलाइट की संख्या आवश्यक होती है, इसलिए इस स्थिति पर वैज्ञानिकों की नजर बनी हुई है।
नए सैटेलाइट लॉन्च की तैयारी
ISRO इस समस्या के समाधान के लिए नए सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नए और उन्नत तकनीक वाले सैटेलाइट के माध्यम से NavIC प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सकता है।
यह भी कहा जा रहा है कि भविष्य में इस प्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाया जाएगा ताकि यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके।
डिजिटल सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण
आज के समय में सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्मार्ट तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्मार्टफोन, वाहन नेविगेशन, ड्रोन तकनीक और कई डिजिटल सेवाएं इसी प्रणाली पर निर्भर होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली का मजबूत होना भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
NavIC प्रणाली भारत की एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि मानी जाती है। हालांकि हाल की तकनीकी समस्या ने कुछ चुनौतियां जरूर पैदा की हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का विश्वास है कि नए सैटेलाइट और उन्नत तकनीक के माध्यम से इस प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सकेगा।












